गुरुवार, 7 जनवरी 2010

गजल - एक बार फिर

क्या हम इस बात पर गुमान करें 
मुल्क में खुदकुशी किसान करें 

अपनी खेती उन्हें पसंद आई                  
आइए,  मिल  के कन्यादान करें 

सारी दुनिया को हम से हमदर्दी 
जैसे बगुले नदी पे ध्यान करें 

देश, मजहब, समाज, खुद्दारी 
काहे सांसत में अपनी जान करें 

कर्ज़ से गर निजात चाहिए, तो 
आप सोने की गाय दान करें 

इस तरफ आदमी, उधर कुत्ता 
बोलिए, किस को सावधान करें! 

28 टिप्‍पणियां:

निर्मला कपिला ने कहा…

क्या हम इस बात पर गुमान करें
मुल्क में खुदकुशी किसान करें

देश, मजहब, समाज, खुद्दारी
काहे सांसत में अपनी जान करें

कर्ज़ से गर निजात चाहिए, तो
आप सोने की गाय दान करें
वाह लाजवाब आपकी शायरी मे समाज का चेहरा अपके शब्दों के कमाल मे और भी मुखरित हो उठता है। उम्दा गज़ल के लिये बधाई

अजय कुमार ने कहा…

वाह , कमाल की रचना है

वन्दना ने कहा…

waah.........bahut hi shandar rachna........samaj ke moonh par jaise tamacha jad diya ho......aaj ke sach ko ujagar karti rachna..........badhayi.

psingh ने कहा…

बहु खूब सुन्दर रचना
क्या हम इस बात पर गुमान करें
मुल्क में खुदकुशी किसान करें
बहुत बहत आभार

नीरज गोस्वामी ने कहा…

सर्वत साहब...क्या बात है...वल्लाह...हर शेर पे दम निकलता है...वाह...शायरी को एक नयी दिशा दी है आपने...बेहद खूबसूरत असरदार शेर कहें हैं इस ग़ज़ल में:

सारी दुनिया को हम से हमदर्दी
जैसे बगुले नदी पे ध्यान करें

मुझे याद नहीं पड़ता इस से खूबसूरत बात किसी ने भी हमें मदद करने वाले देशों के बारे में इस से पहले कही हो...क्या शेर है...वाह...वा...

कर्ज़ से गर निजात चाहिए, तो
आप सोने की गाय दान करें

इस तरफ आदमी, उधर कुत्ता
बोलिए, किस को सावधान करें

ये वो शेर हैं जिन्हें कहने के लिए एक उम्र का तजुर्बा चाहिए...इन्हें अपने साथ लिए जा रहा हूँ...
लिखते रहें क्यूँ की आपको पढना बहुत अच्छा लगता है.
नीरज

योगेश स्वप्न ने कहा…

सारी दुनिया को हम से हमदर्दी
जैसे बगुले नदी पे ध्यान करें

wah sarwat ji , sabhi sher behatareen hai ji, badhaai.

Devendra ने कहा…

इस तरफ आदमी, उधर कुत्ता
बोलिए, किस को सावधान करें!
...वाह क्या बात है।

राज भाटिय़ा ने कहा…

सारी दुनिया को हम से हमदर्दी
जैसे बगुले नदी पे ध्यान करें
वाह बहुत गहरे भाव लिये है आप की गजल
धन्यवाद

सतीश सक्सेना ने कहा…

गज़ब का लिखते हो यार ! दिली शुभकामनायें !

अर्कजेश ने कहा…

क्‍या बात है ! अति सुंदर !

देश, मजहब, समाज, खुद्दारी
काहे सांसत में अपनी जान करें


इस तरफ आदमी, उधर कुत्ता
बोलिए, किस को सावधान करें!

हर शेर हीरा है ....

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

मोहतरम सर्वत साहब, आदाब
हालात और माहौल को
जिस खूबसूरती से
आप अश'आर की शक्ल में पेश करते हैं
क्या उन्हें सिर्फ़ ग़ज़ल कह देना काफ़ी है?
ये फिक्रो-फन कुदरत का तोहफ़ा है आपके पास
हर शेर लाजवाब है,
वाह वाह
सुबहान अल्लाह
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

MUFLIS ने कहा…

वाह ! वाह !!
आज के हालात को मद्दे-नज़र रखते हुए
कया खूब अश`आर निकाले हैं आपने
जिन बातों को कह लेने के लिए
कई मुबाहिसे दरकार रहते हैं ...
आपने उन्हें चंद चुनिन्दा
अलफ़ाज़ में बयान कर डाला है

मतला ख़ुद ही अपनी बात कह लेने में
कामयाब बन पडा है है ...

और ये शेर ख़ास तौर पर काबिल-ए-ज़िक्र है

सारी दुनिया को हम से हमदर्दी
जैसे बगुले नदी पे ध्यान करें.....

और यहाँ .......
कर्ज़ से गर निजात चाहें , तो
आप सोने की...........

एक मेआरी ग़ज़ल कहने पर ढेरों मुबारकबाद

सतीश सक्सेना ने कहा…

आपके द्वारा आदमी और कुत्ते की तुलना में मैंने कुछ लिखा है कृपया जरूर देखिएगा !
http://satish-saxena.blogspot.com/2010/01/blog-post.html

शुभकामनायें !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

क्या हम इस बात पर गुमान करें
मुल्क में खुदकुशी किसान करें

अपनी खेती उन्हें पसंद आई
आइए, मिल के कन्यादान करें

सारी दुनिया को हम से हमदर्दी
जैसे बगुले नदी पे ध्यान करें

देश, मजहब, समाज, खुद्दारी
काहे सांसत में अपनी जान करें

कर्ज़ से गर निजात चाहिए, तो
आप सोने की गाय दान करें

इस तरफ आदमी, उधर कुत्ता
बोलिए, किस को सावधान करें!..

सलाम सर्वत साहब ......... कतल हैं सारे शेर .......... सुभान अल्ला ...... एक शेर लिखना चाहता था ...... पर पूरी ग़ज़ल इतनी बेहतरीन है की सब शेर दुबारा उतार दिए ........... आज की सचाई को हर शेर बयान कर रहा है ......... सच का आईना है हर शेर ........ आदि से अंत तक युग की गाथा ...........

श्रद्धा जैन ने कहा…

क्या हम इस बात पर गुमान करें
मुल्क में खुदकुशी किसान करें

kis tarah jhinjhod diya hai


सारी दुनिया को हम से हमदर्दी
जैसे बगुले नदी पे ध्यान करें

bahut khoob
देश, मजहब, समाज, खुद्दारी
काहे सांसत में अपनी जान करें

ahaaaaaaaa kya sher kaha hai

कर्ज़ से गर निजात चाहिए, तो
आप सोने की गाय दान करें

kamaal ka sher hai

इस तरफ आदमी, उधर कुत्ता
बोलिए, किस को सावधान करें!
maan gaye sarwat ji
ustaadi aisi sher mein kya kahne
ek ek sher kamaal
har sher ke baad jhamaka

गौतम राजरिशी ने कहा…

ग़ज़ल के तेवर ने एक बार फिर से छुआ संपूर्ण तरीके से....आखिरी शेर का कटाक्ष तो उफ़्फ़्फ़!

आपका स्नेह अभिभूत कर गया है सर। बहुत-बहुत बेहतर हूं अब और कुछ और ज्यादा बेहतर हो गया हूं अब कि आपने इस अदा से तबियत पूछी है...

महावीर ने कहा…

सर्वत साहब,
हर शे'र लाजवाब, दिल को छूता हुआ लगा. मिस्रों में शब्द और भाव नगीनों की तरह जड़े हुए हैं।
महावीर शर्मा

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

हमेशा की तरह लाजवाब कर दिया आपने। अन्तिम शेर तो सवा शेर ही है।
आजकल आप कहाँ हैं, कई बार आपका नम्बर ट्राई किया, हमेशा ऑफ मिलता है।
--------
अपना ब्लॉग सबसे बढ़िया, बाकी चूल्हे-भाड़ में।
ब्लॉगिंग की ताकत को Science Reporter ने भी स्वीकारा।

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

... अब तारीफ़ किस शेर की करें या किस से शुरुवात करें, सब के सब शेर लाजवाब हैं फ़िर भी ... देश, मजहब, समाज, खुद्दारी के नाम पर अपनी जान जोखिम में क्यों डालें, जो हो रहा है होने दो, होते रहेगा ....बहुत खूब ... वा-भई-वाह बहुत खूब जो कर्ज ही नही चुकाना चाहता वो भला सोने की गाय दान करने का जोखिम क्यों ले वो तो यही सोचे बैठा है कि लोगो का कर्ज चुकाने से बेहतर कर्ज की रकम को पीठ पर बांध कर नर्क ले जायेगा ...ये और भी गजब है आदमी को कुत्ते से सचेत किया जाये या कुत्ते को आदमी से, दोनो मे ज्यादा खतरनाक आखिर कौन है !!!!
....बहुत खूब, उम्दा, बेहतरीन !!!!!

psingh ने कहा…

सर्वत साहब
इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए एक बार फिर
बहुत बहुत बधाई ......................

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

क्या हम इस बात पर गुमान करें
मुल्क में खुदकुशी किसान करें
वाह ......!!
इस तरफ आदमी, उधर कुत्ता
बोलिए, किस को सावधान करें!

आपकी गजलें समय पर तीखा प्रहार करती हैं ......!!

लुधिआना के मुशायरे के लिए शुभकामनाएं .......!!

सुलभ 'सतरंगी' ने कहा…

एक बार फिर आपने ग़ज़ल में तेवर में दिखाए हैं...
सबको सावधान कर दिया.. बहुत खूब...

- सुलभ

sandhyagupta ने कहा…

क्या हम इस बात पर गुमान करें
मुल्क में खुदकुशी किसान करें

देश, मजहब, समाज, खुद्दारी
काहे सांसत में अपनी जान करें


Gehra asar chodti hai rachna.Badhai.

shama ने कहा…

इस तरफ आदमी, उधर कुत्ता
बोलिए, किस को सावधान करें!
Kitna sach hai! Ek taraf hamare kisan aur karigar atmhatya kar rahe hain...doosari taraf ham 2020 me Bharat global power banega ye baat karte hain! Globalisation kee or kya ham inki lashon ko raundte hue badhenge ya inhen saath le chalenge?

रचना दीक्षित ने कहा…

इस तरफ आदमी, उधर कुत्ता
बोलिए, किस को सावधान करें!

वाह !!!!! क्या क्या कह दिया. बेमिसाल

shyam1950 ने कहा…

भाई वाह!

इस तरफ आदमी उस तरफ कुत्ता
बोलिए किसको सावधन करें
सारी दुनिया को हमसे हमदर्दी
जैसे बगुले नदी पे ध्यान करें

दमदार और जमीन से जुडी शायरी... मुबारक

श्याम सखा 'श्याम' ने कहा…

क्या हम इस बात पर गुमान करें
मुल्क में खुदकुशी किसान करें - bahut sunder


देश, मजहब, समाज, खुद्दारी
काहे सांसत में अपनी जान करें -aaz ke aadmi ki mnodsha ko sahi ukera
badhaayee

अशोक मधुप ने कहा…

अपनी खेती उन्हें पसंद आई
आइए, मिल के कन्यादान करें

इस तरफ आदमी, उधर कुत्ता
बोलिए, किस को सावधान करें!

शानदार गजलं बधाई, भाई कमाल का लिखते है। आप तो