शनिवार, 24 अप्रैल 2010

गज़ल

अमीर कहता है इक जलतरंग है दुनिया
गरीब कहते हैं क्यों हम पे तंग है दुनिया

घना अँधेरा, कोई दर न कोई रोशनदान 
हमारे वास्ते शायद सुरंग है दुनिया 

बस एक हम हैं जो तन्हाई के सहारे हैं 
तुम्हारा क्या है, तुम्हारे तो संग है दुनिया 

कदम कदम पे ही समझौते करने पड़ते हैं 
निजात किस को मिली है, दबंग है दुनिया 

वो कह रहे हैं कि दुनिया का मोह छोड़ो भी 
मैं कह रहा हूँ कि जीवन का अंग है दुनिया 

अजीब लोग हैं ख्वाहिश तो देखिए इनकी 
हैं पाँव कब्र में लेकिन उमंग है दुनिया 

अगर है सब्र तो नेमत लगेगी  दुनिया भी                                                         
नहीं है सब्र अगर फिर तो जंग है दुनिया 

इन्हें मिटाने की कोशिश में लोग हैं लेकिन 
गरीब आज भी जिंदा हैं, दंग है दुनिया   

33 टिप्‍पणियां:

सुलभ § सतरंगी ने कहा…

सर्वत चचा!
अब तक की बेहतरीन ग़ज़ल से सामना हुआ... निशब्द हूँ.

सुलभ § सतरंगी ने कहा…

पता नहीं मुझे ऐसा क्यूँ लग रहा है की, इस शेर में...
इन्हें मिटाने की कोशिश में लोग हैं लेकिन
गरीब आज भी जिंदा हैं, दंग है दुनिया

...आपने अपने गुस्से और वस्तुस्थिति का इज़हार किया है. आप जब भी गभीर होते हैं, माशा अल्लाह ग़ज़ल इस तरह मेहरबान होती है की हम तो आपके आगे बौने लगते हैं. यह तेवर कायम रहे, सर्वत साहब. दुआ है.

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

इन्हें मिटाने की कोशिश में लोग हैं लेकिन
गरीब आज भी जिंदा हैं, दंग है दुनिया
खूबसूरत शेरों से सजी सुन्दर गज़ल. बस इसी प्रकार हमें अपनी गज़लों से मालामाल रखें.

स्वप्निल कुमार 'आतिश' ने कहा…

bahut pasand aayi aapki ghazal .... :)

राज भाटिय़ा ने कहा…

इन्हें मिटाने की कोशिश में लोग हैं लेकिन
गरीब आज भी जिंदा हैं, दंग है दुनिया
बहुत अच्छी लगी आप की यह दुनिया,
गरीब के दम पै है यह दुनिया.
बहुत धन्यवाद

दिलीप ने कहा…

bahut khoob...ye duniya agar mil bhi jaye to kya hai..

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

सर्वत जी,मैं बस इतना कहूँगा आपके ग़ज़ल को पढ़ना मेरे लिए एक सौभाग्य की बात हैं..

यह भी बेहतरीन...धन्यवाद

हिमान्शु मोहन ने कहा…

वाकई सर्वत साहब,
दंग है दुनिया!

कोई मज़हब पे फ़िदा कोई धर्म पे पागल
मेरी नाफ़िक्री पे ख़ुश है, मलंग है दुनिया

कभी मिल बैठो कभी नेह के धागे जोड़ो
यही तहज़ीब यही जमनो-गंग है दुनिया
आदाब!

हिमान्शु मोहन ने कहा…

लूट लेने को लोग बदहवास फिरते हैं
कटेगी कब? बड़ी रंगीं पतंग है दुनिया

सर्वत साहब, मेरा मानना है कि अच्छी रचना वो होती है जो तुरन्त कुछ रचने को इंस्पायर करती है, प्रेरणा देती है। इस हिसाब से बेहद कामयाब ग़ज़ल रही, मेरी दाद क़बूल करें।
मेरी गुस्ताख़ी को नज़र-अंदाज़ कीजिएगा, ये इल्तेजा भी है,

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

पूरी ग़ज़ल बेहतरीन......
कदम कदम पे ही समझौते करने पड़ते हैं
निजात किस को मिली है, दबंग है दुनिया
यादगार...लाजवाब शेर
वो कह रहे हैं कि दुनिया का मोह छोड़ो भी
मैं कह रहा हूँ कि जीवन का अंग है दुनिया
हासिल ए ग़ज़ल शेर लगा है.

MUFLIS ने कहा…

हुज़ूर....
आपके नायाब ख़ज़ाने का
एक और क़ीमती नगीना ....
वाह - वा !!
"वो कह रहे हैं कि दुनिया का मोह छोड़ो भी
मैं कह रहा हूँ कि जीवन का अंग है दुनिया"
"बस एक हम हैं जो तन्हाई के सहारे हैं
तुम्हारा क्या है, तुम्हारे तो संग है दुनिया"
ये शेर ख़ास तौर पर पसंद आये हैं
ग़ज़ल में
हताशा और उम्मीद इस क़दर गुंथे हुए हैं
कि कुछ कहते नहीं बनता ....
आपकी इनफरादियत बस आपकी ही है
इस में कोई शक नहीं ...

नहाओ लाख सरोवर, मलो भभूती भी
उतर सका न कभी ऐसा रंग है दुनिया

दिगम्बर नासवा ने कहा…

निःशब्द ... आप जो भी कहना चाहते हैं ... शब्दशह सामने आ जाता है .... इतनी खूबसूरत अड़ायगी होती है की बात सीधे से समझ आ जाती है ... दुनिया के अनुभवों को दो लाइनों में समेटने में आपको महारत है ....

सतीश सक्सेना ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
सतीश सक्सेना ने कहा…

यह तो लगा, मेरे लिए लिख रहे हो, कभी सोचता था ५० साल नहीं जी पाऊंगा ! मगर अब ५५ हो गए यार , और आदत हमारी सरवत भाई बिलकुल ऐसी ही है...लगता है तुम बुड्ढे हो गए हो .... बुरा तो नहीं मान सकते मुझे भरोसा है तो फिर आगे से ऐसा शेर नहीं लिखना !
नो थैंक्स टू यू !

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

अगर है सब्र तो नेमत लगेगी दुनिया भी
नहीं है सब्र अगर फिर तो जंग है दुनिया

कदम कदम पे ही समझौते करने पड़ते हैं
निजात किस को मिली है, दबंग है दुनिया

बेहतरीन अश’आर से मालामल ग़ज़ल पढ़ने को मिली
लेकिन ये दो अश’आर मुझे बहुत पसंद आए,
बहुत ख़ूब

kshama ने कहा…

घना अँधेरा, कोई दर न कोई रोशनदान
हमारे वास्ते शायद सुरंग है दुनिया
Waise to pooreee rachana dohrayi ja sakti hai!
'Raton ki baaraaten,dinon ke qafile,
chhatparse guzarte rahe...'

वीनस केशरी ने कहा…

अमीर कहता है इक जलतरंग है दुनिया
गरीब कहते हैं क्यों हम पे तंग है दुनिया

घना अँधेरा, कोई दर न कोई रोशनदान
हमारे वास्ते शायद सुरंग है दुनिया

बस एक हम हैं जो तन्हाई के सहारे हैं
तुम्हारा क्या है, तुम्हारे तो संग है दुनिया

कदम कदम पे ही समझौते करने पड़ते हैं
निजात किस को मिली है, दबंग है दुनिया

वो कह रहे हैं कि दुनिया का मोह छोड़ो भी
मैं कह रहा हूँ कि जीवन का अंग है दुनिया

अजीब लोग हैं ख्वाहिश तो देखिए इनकी
हैं पाँव कब्र में लेकिन उमंग है दुनिया

अगर है सब्र तो नेमत लगेगी दुनिया भी
नहीं है सब्र अगर फिर तो जंग है दुनिया

इन्हें मिटाने की कोशिश में लोग हैं लेकिन
गरीब आज भी जिंदा हैं, दंग है दुनिया

बस जी यही पसंद आया

इसके सिवा कुछ नहीं :)

arun c roy ने कहा…

'jarib jinda hai, dang hai duniya'... umda gazal... hum rahenge puri shiddat ke saath aur amiron ki duniya yo hi dang rahegi...

शिव कुमार "साहिल" ने कहा…

Aadarniye sarwat Sahab Ji ..

Chanrnbandna

Sari Ghazal bahut hi achi lagi....
Bar-Bar pad rha hun .. bahut hi lazbaab

Shukriya

M VERMA ने कहा…

बस एक हम हैं जो तन्हाई के सहारे हैं
तुम्हारा क्या है, तुम्हारे तो संग है दुनिया
****
ये दुनिया बहुत फितरती है मान लीजिये
किसको पता किसके संग है दुनिया

बेहतरीन रचना सर्वत जी
बहुत खूब

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

अगर है सब्र, तो नेमत लगेगी दुनिया भी
नहीं है सब्र अगर, फिर तो जंग है दुनिया
.... बहुत खूब ... लाजवाब!!!!

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

...इस शेर में एक "टिप्पणीकार" की हैसियत से टिप्पणी स्वरूप दो जगह "," (कामा) लगा लिया हूं, ... लाजवाब शेर, लाजवाब गजल ... बहुत बहुत बधाई !!!

निर्मला कपिला ने कहा…

DIL CHAHTA HAI VENUS KESARI VALI TIPPANI CHHAP DOON BAHUT HI ACHHI LAGEE GAZAL IS SHER KEE KYAA KAHOON----
अजीब लोग हैं ख्वाहिश तो देखिए इनकी
हैं पाँव कब्र में लेकिन उमंग है दुनिया
VAAH BHAAI YE DIL KO CHHOO GAYAA BADHAAI AUR SHUBHAKAAMANAYEN JALDI ME ITANA HEE

श्रद्धा जैन ने कहा…

अमीर कहता है इक जलतरंग है दुनिया
गरीब कहते हैं क्यों हम पे तंग है दुनिया

waah matla khoob shuru kiya hai
gazal ke bhaav yahi par tay ho gaye ..........

घना अँधेरा, कोई दर न कोई रोशनदान
हमारे वास्ते शायद सुरंग है दुनिया

aha kya sher kaha hai
surang ka kafiya ...... kamaal hai

बस एक हम हैं जो तन्हाई के सहारे हैं
तुम्हारा क्या है, तुम्हारे तो संग है दुनिया

कदम कदम पे ही समझौते करने पड़ते हैं
निजात किस को मिली है, दबंग है दुनिया

वो कह रहे हैं कि दुनिया का मोह छोड़ो भी
मैं कह रहा हूँ कि जीवन का अंग है दुनिया

अजीब लोग हैं ख्वाहिश तो देखिए इनकी
हैं पाँव कब्र में लेकिन उमंग है दुनिया

अगर है सब्र तो नेमत लगेगी दुनिया भी
नहीं है सब्र अगर फिर तो जंग है दुनिया

saar likh diya zindgi ka aapne

इन्हें मिटाने की कोशिश में लोग हैं लेकिन
गरीब आज भी जिंदा हैं, दंग है दुनिया

is sher ke to jalwe hi alag hai

gareeb zinda hai dang hai duniya .......

bahut bahut khoobsurat gazal hui hai Sarwat ji

श्याम सखा 'श्याम' ने कहा…

ाआपकी गज़ल के हर शे‘र पर दंग हूं मैं ,दुनिया अपनी जाए -कमाल है सर्वत भाई-वाकई कमाल

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

दुनिया की सुंदर परिभाषा। बधाई।
--------
गुफा में रहते हैं आज भी इंसान।
ए0एम0यू0 तक पहुंची ब्लॉगिंग की धमक।

singhsdm ने कहा…

शरवत साहब......होश उड़ गए हमारे.......आपसे सीखता हूँ कि ग़ज़ल कैसे कहनी चाहिए......!
अमीर कहता है इक जलतरंग है दुनिया
गरीब कहते हैं क्यों हम पे तंग है दुनिया
बेहतरीन मतला है हुज़ूर......कितनी भी दाद दूं कम ही लगेंगी (पूरी मुआफी चाहूँगा पहले मिसरे में एकवचन और दूसरे में बहुवचन ......कुछ खटकता है......)

घना अँधेरा, कोई दर न कोई रोशनदान
हमारे वास्ते शायद सुरंग है दुनिया
क्या बात है,.......लूट लिया.....!

बस एक हम हैं जो तन्हाई के सहारे हैं
तुम्हारा क्या है, तुम्हारे तो संग है दुनिया
क्या तंज़ है हालत पर.....वाह वाह......!

कदम कदम पे ही समझौते करने पड़ते हैं
निजात किस को मिली है, दबंग है दुनिया
उफ़......जिंदगी कि सच्चाई लिख दी आपने.....!

वो कह रहे हैं कि दुनिया का मोह छोड़ो भी
मैं कह रहा हूँ कि जीवन का अंग है दुनिया
ग़ज़ल में जब दर्शन हो जाये तो ग़ज़ल रूह तक पहुँच जाती है........रूहानी शेर जो दिल में जज़्ब हो गया.

अजीब लोग हैं ख्वाहिश तो देखिए इनकी
हैं पाँव कब्र में लेकिन उमंग है दुनिया
सच कहा सर्वात साहब......खाहिशों का कोई अंत नहीं......

इन्हें मिटाने की कोशिश में लोग हैं लेकिन
गरीब आज भी जिंदा हैं, दंग है दुनिया
क्या मज़मून है............!
उम्दा ग़ज़ल के लिया शुक्रिया......!

singhsdm ने कहा…

शरवत साहब......होश उड़ गए हमारे.......आपसे सीखता हूँ कि ग़ज़ल कैसे कहनी चाहिए......!
अमीर कहता है इक जलतरंग है दुनिया
गरीब कहते हैं क्यों हम पे तंग है दुनिया
बेहतरीन मतला है हुज़ूर......कितनी भी दाद दूं कम ही लगेंगी (पूरी मुआफी चाहूँगा पहले मिसरे में एकवचन और दूसरे में बहुवचन ......कुछ खटकता है......)

घना अँधेरा, कोई दर न कोई रोशनदान
हमारे वास्ते शायद सुरंग है दुनिया
क्या बात है,.......लूट लिया.....!

बस एक हम हैं जो तन्हाई के सहारे हैं
तुम्हारा क्या है, तुम्हारे तो संग है दुनिया
क्या तंज़ है हालत पर.....वाह वाह......!

कदम कदम पे ही समझौते करने पड़ते हैं
निजात किस को मिली है, दबंग है दुनिया
उफ़......जिंदगी कि सच्चाई लिख दी आपने.....!

वो कह रहे हैं कि दुनिया का मोह छोड़ो भी
मैं कह रहा हूँ कि जीवन का अंग है दुनिया
ग़ज़ल में जब दर्शन हो जाये तो ग़ज़ल रूह तक पहुँच जाती है........रूहानी शेर जो दिल में जज़्ब हो गया.

अजीब लोग हैं ख्वाहिश तो देखिए इनकी
हैं पाँव कब्र में लेकिन उमंग है दुनिया
सच कहा सर्वात साहब......खाहिशों का कोई अंत नहीं......

इन्हें मिटाने की कोशिश में लोग हैं लेकिन
गरीब आज भी जिंदा हैं, दंग है दुनिया
क्या मज़मून है............!
उम्दा ग़ज़ल के लिया शुक्रिया......!

psingh ने कहा…

sarwat sahab bahut hi sundra gajal

अर्कजेश ने कहा…

मुझे इस ब्‍लॉग पर पढी हुई सबसे बेहतरीन गजलों में से एक लगी । भाव और लय दोनों दृष्टि से ।

हर शे'र नायाब है । आपकी शायरी में जो आग या तडप है वही इसकी जान है और हर बार अपनी गजलों में आप इसे व्‍यक्‍त कर पाते हैं

अमीर कहता है इक जलतरंग है दुनिया
गरीब कहते हैं क्यों हम पे तंग है दुनिया

घना अँधेरा, कोई दर न कोई रोशनदान
हमारे वास्ते शायद सुरंग है दुनिया


इन्हें मिटाने की कोशिश में लोग हैं लेकिन
गरीब आज भी जिंदा हैं, दंग है दुनिया

Dr. Amar Jyoti ने कहा…

बहुत सधी और सुलझी हुई बेहतरीन ग़ज़ल।'वो कह रहे है के……'तो हासिल-ए-ग़ज़ल है। बधाई।

गौतम राजरिशी ने कहा…

कमाल के काफ़ियों से सजी-धजी लाजवाब अशआर से भरी ग़ज़ल सर जी...

इस शेर को नोट कर लिया है यत्र-तत्र-सर्वत्र उद्धृत करने के लिये
"बस एक हम हैं जो तन्हाई के सहारे हैं
तुम्हारा क्या है, तुम्हारे तो संग है दुनिया"

पद्म सिंह ने कहा…

लाजवाब और अनमोल गज़ल ... एक एक शे'र मोती ...

इन्हें मिटाने की कोशिश में लोग हैं लेकिन
गरीब आज भी जिंदा हैं, दंग है दुनिया
वाकई आपकी गज़ल कारी पर भी दुनिया दंग है
नमन है आपको ...